कृषि प्रधान राज्य हरियाणा में किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें पारंपरिक खेती (जैसे गेहूं और धान) से हटाकर बागवानी (Horticulture) की तरफ मोड़ने के लिए राज्य सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। लेकिन बागवानी फसलों (सब्जियां, फल और मसाले) में सबसे बड़ा जोखिम प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की मार का होता है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, पाला पड़ना या तापमान में अचानक बदलाव किसानों की महीनों की मेहनत को कुछ ही घंटों में बर्बाद कर देता है।
किसानों की इसी चिंता को दूर करने और उन्हें एक मजबूत सुरक्षा कवच (Safety Shield) प्रदान करने के लिए हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (Mukhya Mantri Bagwani Bima Yojana – MMBBY) की शुरुआत की है। साल 2026 में इस योजना को और भी व्यापक बना दिया गया है। पहले जहां इस योजना में केवल 21 फसलें शामिल थीं, वहीं अब 2026 के अपडेट के अनुसार इसमें 46 बागवानी फसलों को कवर किया जा रहा है।
यदि आप हरियाणा के एक किसान हैं और बागवानी करते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। आज हम Haryana Mukhyamantri Bagwani Bima Yojana Registration 2026 की पूरी प्रक्रिया, प्रीमियम राशि, मुआवजे का गणित, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन कैसे करें, इस पर 100% सटीक और विस्तृत जानकारी देने जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (MMBBY) 2026: एक नज़र में (Overview)
आवेदन प्रक्रिया और गहराई में जाने से पहले, आइए इस सरकारी योजना के मुख्य बिंदुओं पर एक नज़र डालते हैं:
| योजना का नाम | मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (MMBBY) |
| राज्य | हरियाणा (Haryana) |
| किसके द्वारा संचालित | बागवानी विभाग, हरियाणा सरकार (Horticulture Department) |
| योजना का उद्देश्य | प्राकृतिक आपदाओं से बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई करना |
| लाभार्थी | हरियाणा के सभी पंजीकृत बागवानी किसान |
| कवर की जाने वाली फसलें | 46 (सब्जियां, फल और मसाले) |
| प्रीमियम राशि (किसानों द्वारा देय) | मात्र 2.5% (सब्जियों/मसालों के लिए 750 रुपये, फलों के लिए 1000 रुपये प्रति एकड़) |
| अधिकतम मुआवजा (Sum Insured) | सब्जियों/मसालों के लिए 30,000 रुपये, फलों के लिए 40,000 रुपये प्रति एकड़ |
| पंजीकरण का माध्यम | ऑनलाइन (‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के माध्यम से) |
| आधिकारिक वेबसाइट | fasal.haryana.gov.in / haryanait.gov.in |
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना क्या है? (What is MMBBY Scheme?)
हरियाणा सरकार ने महसूस किया कि पारंपरिक ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)’ में मुख्यतः गेहूं, धान, कपास और बाजरा जैसी फसलों पर जोर दिया जाता है। बागवानी करने वाले किसानों के लिए कोई विशेष और प्रभावी बीमा योजना नहीं थी। फलों और सब्जियों की खेती में लागत (Input Cost) अधिक होती है, इसलिए नुकसान होने पर किसान कर्ज में डूब जाता है।
इसी समस्या के समाधान के रूप में Mukhya Mantri Bagwani Bima Yojana (MMBBY) का जन्म हुआ। यह एक वैकल्पिक (Optional) योजना है। इसके तहत अगर किसान की फसल प्राकृतिक आपदा (जैसे ओले गिरना, बाढ़ आना, आग लगना, बादल फटना आदि) के कारण बर्बाद हो जाती है, तो सरकार एक सर्वे के आधार पर किसान के बैंक खाते में सीधे (DBT) मुआवजे की राशि भेजती है। साल 2026 में इसके नियमों को और अधिक पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाया गया है।
2026 में योजना में हुए बड़े बदलाव (Key Updates in 2026)
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फसलों की संख्या में वृद्धि: शुरुआत में केवल 21 फसलों (14 सब्जियां, 2 मसाले, 5 फल) को बीमा के दायरे में रखा गया था, लेकिन 2026 तक यह दायरा बढ़ाकर 46 फसलों का कर दिया गया है।
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तेज मुआवजा प्रक्रिया: राज्य स्तरीय निगरानी समिति (State Level Monitoring Committee) और जिला समितियों का पुनर्गठन किया गया है ताकि सर्वे की रिपोर्ट जल्द से जल्द पोर्टल पर अपलोड हो और किसानों को समय पर क्लेम मिल सके।
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पोर्टल एकीकरण (Portal Integration): अब MMBBY पोर्टल को पूरी तरह से ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा (Meri Fasal Mera Byora – MFMB)’ से जोड़ दिया गया है। बिना MFMB रजिस्ट्रेशन के इस योजना का लाभ नहीं लिया जा सकता।
किन-किन आपदाओं में मिलता है मुआवजा? (Risks Covered)
यह समझना बहुत जरूरी है कि यह योजना किन परिस्थितियों में आपके नुकसान की भरपाई करेगी। यदि किसान की फसल में निम्नलिखित कारणों से नुकसान होता है, तो वह क्लेम का हकदार होगा:
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ओलावृष्टि (Hailstorm): ओले गिरने से सब्जियों और फलों को होने वाला भौतिक नुकसान।
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तापमान और पाला (Frost & Temperature Fluctuations): अत्यधिक ठंड या पाला पड़ने से फसल का जल जाना।
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जलकारक (Water Factors): बाढ़ आना, बादल फटना, अत्यधिक जलभराव (Waterlogging), या नहर/ड्रेन के टूटने से खेत में पानी भर जाना।
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आंधी-तूफान (Typhoon/Windstorm): तेज आंधी के कारण पेड़ों का टूट जाना या फलों का समय से पहले गिर जाना।
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आग लगना (Fire): बिजली गिरने या किसी अन्य प्राकृतिक कारण से खेत में आग लग जाना।
(नोट: यदि नुकसान किसान की खुद की लापरवाही, खराब बीज, या रसायनों के गलत उपयोग से होता है, तो बीमा कवर नहीं मिलेगा।)
2026 के अंतर्गत कवर की जाने वाली 46 फसलों की सूची (List of Covered Crops)
बागवानी विभाग ने 2026 के लिए फसलों की एक विस्तृत सूची जारी की है। यदि आप इनमें से किसी भी फसल की खेती करते हैं, तो आप योजना का लाभ उठा सकते हैं:
1. सब्जियां (Vegetables)
अरबी, भिंडी, करेला, लौकी, बैंगन, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, फूलगोभी, हरी मिर्च, खीरा, ककड़ी, प्याज, मटर, आलू, कद्दू, मूली, तोरई, टिंडा, टमाटर और तरबूज।
2. फल (Fruits)
आंवला, बेर, चीकू, खजूर, ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit), अंजीर, अंगूर, अमरूद, जामुन, किन्नू, लेमन (नींबू), लीची, माल्टा, संतरा, आम, आड़ू, नाशपाती, आलूबुखारा, अनार और स्ट्रॉबेरी।
3. मसाले (Spices)
हल्दी और लहसुन।
इस सूची से स्पष्ट है कि हरियाणा सरकार विदेशी और उच्च आय वाली फसलों (जैसे ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी) को भी सुरक्षा प्रदान कर रही है, ताकि किसान जोखिम लेकर नई खेती कर सकें।
प्रीमियम और मुआवजे का पूरा गणित (Premium & Compensation Structure)
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें किसान को कुल बीमित राशि (Sum Insured) का केवल 2.5 प्रतिशत (नाममात्र शुल्क) ही अपनी जेब से देना होता है, बाकी का खर्च राज्य सरकार वहन करती है।
1. सब्जियों और मसालों के लिए (For Vegetables & Spices)
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बीमा राशि (Sum Insured): ₹30,000 प्रति एकड़
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किसान द्वारा देय प्रीमियम: ₹750 प्रति एकड़ (₹30,000 का 2.5%)
2. फलों के बागों के लिए (For Fruit Orchards)
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बीमा राशि (Sum Insured): ₹40,000 प्रति एकड़
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किसान द्वारा देय प्रीमियम: ₹1,000 प्रति एकड़ (₹40,000 का 2.5%)
नुकसान के आधार पर कितना मिलेगा क्लेम? (Loss Assessment Slabs)
मुआवजे का आकलन खेत में हुए वास्तविक नुकसान के प्रतिशत के आधार पर किया जाता है। इसके लिए 4 स्लैब बनाए गए हैं:
| नुकसान का प्रतिशत (Damage %) | मुआवजा दर (% of Sum Insured) | सब्जियों/मसालों के लिए मुआवजा (रुपये/एकड़) | फलों के लिए मुआवजा (रुपये/एकड़) |
| 0% से 25% | शून्य (Nil) | कोई मुआवजा नहीं | कोई मुआवजा नहीं |
| 26% से 50% | 50% | ₹15,000 | ₹20,000 |
| 51% से 75% | 75% | ₹22,500 | ₹30,000 |
| 75% से अधिक (100% तक) | 100% | ₹30,000 | ₹40,000 |
एक उदाहरण से समझें (Example):
मान लीजिए रामकिशन ने 2 एकड़ में टमाटर (सब्जी) की खेती की है। उसने ₹750 प्रति एकड़ के हिसाब से कुल ₹1500 का प्रीमियम भरा। दुर्भाग्य से ओलावृष्टि के कारण उसकी फसल का 60% नुकसान हो गया।
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नियम के अनुसार, 60% का नुकसान “51% से 75%” वाले स्लैब में आता है।
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इस स्लैब में 75% मुआवजा मिलता है।
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एक एकड़ के लिए टमाटर (सब्जी) की अधिकतम बीमा राशि ₹30,000 है। ₹30,000 का 75% = ₹22,500 प्रति एकड़।
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2 एकड़ के लिए रामकिशन को ₹45,000 सीधे उसके बैंक खाते में मिलेंगे।
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना 2026 के लिए पात्रता (Eligibility Criteria)
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ बुनियादी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है:
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हरियाणा का निवासी: किसान स्थायी रूप से हरियाणा राज्य का निवासी होना चाहिए।
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पंजीकृत किसान: किसान का ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है।
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फसल का प्रकार: किसान केवल उन्हीं 46 फसलों का बीमा करा सकता है जिन्हें सरकार ने अधिसूचित (Notified) किया है।
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काश्तकार/मालिक: योजना का लाभ जमीन के मालिक (Landowner) और ठेके पर खेती करने वाले (Tenant Farmers) दोनों ले सकते हैं, बशर्ते उनकी जानकारी पोर्टल पर दर्ज हो।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने से पहले किसानों को निम्नलिखित दस्तावेजों की स्कैन कॉपी या मूल जानकारी अपने पास रखनी चाहिए:
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आधार कार्ड (Aadhaar Card): पहचान और DBT (Direct Benefit Transfer) के लिए।
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परिवार पहचान पत्र (Family ID / Parivar Pehchan Patra): हरियाणा में सभी सरकारी योजनाओं के लिए यह अनिवार्य है।
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जमीन के कागजात: फर्द (Jamabandi), इंतकाल, या ठेके का एग्रीमेंट।
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बैंक पासबुक की कॉपी: वह बैंक खाता जो आधार कार्ड और NPCI से लिंक हो, ताकि पैसा सीधे खाते में आ सके।
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मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण संख्या (MFMB ID)।
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पासपोर्ट साइज फोटो और चालू मोबाइल नंबर।
Haryana Mukhyamantri Bagwani Bima Yojana Registration 2026: आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Online Apply)
राज्य सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन (Digital) कर दिया है, ताकि किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। आप खुद या किसी नजदीकी ‘अटल सेवा केंद्र (CSC Center)’ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। खुद से आवेदन करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है:
चरण 1: मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पर पंजीकरण
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सबसे पहले हरियाणा सरकार के आधिकारिक पोर्टल fasal.haryana.gov.in पर जाएं।
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होमपेज पर “किसान अनुभाग (Farmer Section)” में जाएं और “किसान पंजीकरण (Farmer Registration)” पर क्लिक करें।
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अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और OTP डालकर लॉग-इन करें।
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अपनी व्यक्तिगत जानकारी, परिवार पहचान पत्र (PPP) नंबर और बैंक की डिटेल भरें।
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इसके बाद अपने खेत की जानकारी (किला नंबर, खसरा नंबर) भरें और बताएं कि आपने कौन सी बागवानी फसल बोई है।
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रजिस्ट्रेशन सबमिट करें और अपनी रसीद/आईडी सुरक्षित रख लें।
चरण 2: मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (MMBBY) पोर्टल पर जाना
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MFMB पर पंजीकरण के बाद, आपको बागवानी विभाग के MMBBY पोर्टल पर जाना होगा। आप बागवानी विभाग की वेबसाइट से इसका लिंक प्राप्त कर सकते हैं।
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पोर्टल पर “Apply for Crop Insurance” या “मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना आवेदन” विकल्प पर क्लिक करें।
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यहाँ आपसे आपका ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पंजीकरण नंबर या आधार नंबर मांगा जाएगा। उसे दर्ज करें।
चरण 3: फसल का चयन और प्रीमियम भुगतान
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जैसे ही आप अपना नंबर डालेंगे, आपके द्वारा MFMB पर दर्ज की गई फसलों का विवरण स्क्रीन पर आ जाएगा।
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अब आपको उन बागवानी फसलों का चयन करना है, जिनका आप बीमा (Insurance) करवाना चाहते हैं।
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(ध्यान दें: योजना वैकल्पिक है, आप चाहें तो खेत के एक हिस्से की फसल का बीमा कराएं और दूसरे का छोड़ दें)।
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फसल का चयन करते ही, पोर्टल ऑटोमैटिक रूप से आपके रकबे (Acreage) के अनुसार प्रीमियम राशि (750 रुपये या 1000 रुपये प्रति एकड़) की गणना कर लेगा।
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“Pay Premium” पर क्लिक करें और नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, या UPI के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान करें।
चरण 4: प्रिंटआउट लेना
भुगतान सफल होने के बाद, आपको स्क्रीन पर एक पावती (Acknowledgement Slip) या बीमा पॉलिसी रिसिप्ट दिखाई देगी। इसे डाउनलोड करके इसका प्रिंटआउट निकाल लें। भविष्य में क्लेम के समय इस रसीद की आवश्यकता होगी।
नुकसान होने पर क्लेम (मुआवजा) कैसे मिलेगा? (Claim Process for Crop Loss)
बीमा करवाना पहला कदम है, लेकिन यदि वास्तव में प्राकृतिक आपदा आ जाए, तो मुआवजा कैसे मिलेगा? इसके लिए सरकार ने एक निश्चित प्रक्रिया तय की है, जिसका पालन करना जरूरी है:
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समय सीमा के भीतर सूचना (Intimation of Loss): नुकसान होने की स्थिति में, किसान को सबसे पहले 72 घंटों (3 दिन) के भीतर संबंधित कृषि विभाग या जिला बागवानी अधिकारी (District Horticulture Officer) को सूचित करना अनिवार्य है।
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पोर्टल पर शिकायत दर्ज करना: किसान स्वयं MMBBY पोर्टल या MFMB पोर्टल के शिकायत अनुभाग में जाकर अपने फसल नुकसान (Crop Loss) की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकता है। आप टोल-फ्री नंबर (यदि विभाग द्वारा जारी किया गया हो) पर भी कॉल कर सकते हैं।
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संयुक्त सर्वे (Joint Survey): आपकी सूचना मिलने के बाद, जिला स्तरीय समिति (District Level Committee) का गठन किया जाएगा। इस समिति में बागवानी विभाग के अधिकारी, राजस्व विभाग के कर्मचारी (पटवारी) और बीमा/योजना के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह टीम आपके खेत में जाकर नुकसान का आकलन (Loss Assessment) करेगी।
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नुकसान का प्रतिशत तय करना: सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि नुकसान 25% से कम है, या 26-50%, 51-75%, या 75% से अधिक है।
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DBT के माध्यम से भुगतान: राज्य स्तरीय निगरानी समिति द्वारा रिपोर्ट अप्रूव होने के बाद, मुआवजे की राशि सीधे पंजीकृत किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
किसानों के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स और सावधानियां
मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना का अधिकतम लाभ उठाने के लिए हरियाणा के किसानों को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
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समय पर पंजीकरण: विभाग हर मौसम (रबी और खरीफ) के अनुसार पोर्टल खोलने की तारीख और अंतिम तिथि (Last Date) निर्धारित करता है। अंतिम तिथि का इंतजार न करें, बुवाई के तुरंत बाद मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर पंजीकरण करें।
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बैंक खाता चालू रखें: यह सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता आधार कार्ड से जुड़ा (Seeded) है और NPCI मैपिंग सक्रिय है। कई बार क्लेम पास हो जाता है, लेकिन बैंक खाते में KYC न होने के कारण पैसा अटक जाता है।
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सटीक जानकारी भरें: खसरा/खतौनी नंबर और फसल का नाम बिल्कुल सही भरें। यदि खेत में आपने ‘टमाटर’ बोया है और पोर्टल पर गलती से ‘आलू’ दर्ज कर दिया, तो क्लेम के समय सर्वेयर इसे निरस्त कर सकता है।
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फोटोग्राफी करें: जब भी प्राकृतिक आपदा से नुकसान हो, तो अपने स्मार्टफोन से जियो-टैग (Geo-tag) के साथ खेत की तस्वीरें और वीडियो जरूर बना लें। यह सर्वे के दौरान बहुत काम आता है।
योजना का महत्व: हरियाणा की कृषि व्यवस्था में बदलाव (Impact of the Scheme)
हरियाणा सरकार की ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ (Mera Pani-Meri Virasat) योजना और ‘भावांतर भरपाई योजना’ (Bhavantar Bharpayee Yojana) के साथ मिलकर MMBBY एक संपूर्ण ईको-सिस्टम तैयार करती है।
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जल संरक्षण (Water Conservation): धान की खेती में अत्यधिक पानी लगता है। सरकार चाहती है कि किसान धान छोड़कर बागवानी अपनाएं। बीमा कवर मिलने से किसानों का डर खत्म होता है और वे बागवानी की तरफ बढ़ते हैं।
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बाजार और मूल्य की सुरक्षा: जहां ‘भावांतर भरपाई योजना’ किसानों को बाजार में दाम गिरने (Price Crash) से बचाती है, वहीं ‘बागवानी बीमा योजना’ उन्हें मौसम की मार से बचाती है। यह डबल प्रोटेक्शन किसानों की आय को सुरक्षित करता है।
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आधुनिक खेती को बढ़ावा: पॉली हाउस (Polyhouse), नेट हाउस और ड्रिप इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) जैसी तकनीकों पर सरकार 50% से ज्यादा सब्सिडी दे रही है। बीमा योजना किसानों को इन महंगी तकनीकों में निवेश करने का हौसला देती है।
Haryana Mukhyamantri Bagwani Bima Yojana Registration 2026 राज्य के उन सभी किसानों के लिए एक वरदान है जो सब्जियों, फलों और मसालों की खेती करते हैं। मात्र 750 रुपये या 1000 रुपये प्रति एकड़ का छोटा सा निवेश (Premium), किसानों को 30,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये तक की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी देता है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, जहां मौसम का कोई भरोसा नहीं है, फसल का बीमा कराना एक समझदारी भरा और अनिवार्य कदम बन गया है।
यदि आप भी बागवानी करते हैं, तो आज ही अपने नजदीकी सीएससी सेंटर (CSC) पर जाएं या ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (MMBBY) 2026 के तहत कितनी फसलें कवर की जा रही हैं?
साल 2026 के नवीनतम अपडेट के अनुसार, इस योजना के तहत कुल 46 बागवानी फसलों को कवर किया गया है। इनमें विभिन्न प्रकार की सब्जियां, फल और मसाले (जैसे अरबी, टमाटर, आम, ड्रैगन फ्रूट, हल्दी आदि) शामिल हैं।
2. इस योजना के तहत किसानों को कितना प्रीमियम देना होता है?
किसानों को कुल बीमित राशि का केवल 2.5 प्रतिशत प्रीमियम के रूप में देना होता है। सब्जियों और मसालों के लिए यह राशि 750 रुपये प्रति एकड़ है, जबकि फलों की खेती के लिए प्रीमियम 1000 रुपये प्रति एकड़ तय किया गया है।
3. फसल का 100% नुकसान होने पर कितनी मुआवजा राशि मिलती है?
यदि प्राकृतिक आपदा के कारण खेत में 75% से अधिक (यानी 100% तक) नुकसान होता है, तो सरकार द्वारा सब्जियों और मसालों के लिए अधिकतम 30,000 रुपये प्रति एकड़ और फलों के लिए अधिकतम 40,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा सीधे किसान के बैंक खाते में दिया जाता है।
4. क्या MMBBY के लिए ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पर पंजीकरण अनिवार्य है?
जी हाँ, मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना का लाभ केवल वही किसान ले सकते हैं, जिन्होंने अपनी फसल और रकबे का विवरण हरियाणा सरकार के ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करवाया है।
5. आपदा आने के कितने समय के भीतर नुकसान की सूचना देनी चाहिए?
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, फसल को प्राकृतिक आपदा (जैसे ओले, बाढ़, आग) से नुकसान पहुंचने की स्थिति में किसान को 72 घंटों (3 दिन) के भीतर कृषि या बागवानी विभाग के पोर्टल, टोल-फ्री नंबर या संबंधित अधिकारी को सूचित करना अनिवार्य है ताकि समय पर सर्वे हो सके।