सनातन हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने, पूजा-पाठ करने, यात्रा पर जाने या नए व्यापार का आरंभ करने से पहले पंचांग (Panchang) देखने की प्राचीन परंपरा है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना है— तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन पांचों अंगों की सटीक जानकारी के बिना समय की शुभता और अशुभता का आकलन नहीं किया जा सकता।
आज 21 जुलाई 2026, मंगलवार का दिन है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान जी और ग्रहों के सेनापति मंगल देव को समर्पित होता है। इसके साथ ही आज चित्रा नक्षत्र और सिद्ध योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। हालांकि, आज दिन के कुछ हिस्से में ‘भद्रा’ (विष्टि करण) भी व्याप्त रहेगी, जिसका ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
इस विस्तृत लेख में हम आपको 21 जुलाई 2026 के पंचांग की न केवल तालिका (Table) प्रदान करेंगे, बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग, मुहूर्त, राहुकाल और आज के दिन किए जाने वाले विशेष उपायों का गहन विश्लेषण भी करेंगे।
21 जुलाई 2026 का पंचांग: एक नज़र में (Today’s Panchang Table)
पंचांग के मूल तत्वों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को ध्यान से देखें। इसमें आज के दिन की सभी खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाएं दी गई हैं:
| पंचांग के अंग (Panchang Elements) | विवरण (Details) |
| दिनांक (Date) | 21 जुलाई 2026 (21 July 2026) |
| वार (Day) | मंगलवार (Tuesday) |
| माह (अमावस्यांत) | आषाढ़ |
| माह (पूर्णिमांत) | आषाढ़ |
| पक्ष (Lunar Phase) | शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) |
| तिथि (Tithi) | अष्टमी तिथि (22 जुलाई सुबह 05:16 बजे तक), उसके बाद नवमी |
| नक्षत्र (Nakshatra) | चित्रा नक्षत्र (रात 08:48 बजे तक), उसके बाद स्वाति |
| योग (Yoga) | सिद्ध योग (शाम 06:24 बजे तक), उसके बाद साध्य योग |
| करण (Karana) | विष्टि (भद्रा) करण (शाम 04:34 बजे तक), उसके बाद बव (भाव) करण |
| सूर्य राशि (Sun Sign) | कर्क राशि (Cancer) |
| चंद्र राशि (Moon Sign) | कन्या राशि (सुबह 07:54 बजे तक), उसके बाद तुला राशि (Libra) |
| ऋतु (Season) | वर्षा ऋतु (Monsoon) |
| आयन (Ayan) | दक्षिणायन (Dakshinayan) |
| विक्रम संवत (Vikram Samvat) | 2083 (संवत्सर: पराभव / रौद्र) |
| शक संवत (Shaka Samvat) | 1948 |
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय (Sunrise & Sunset Timings)
किसी भी दिन के व्रत और पंचांग की गणना सूर्योदय से ही मानी जाती है। आइए जानते हैं आज सूर्य और चंद्रमा के उदय और अस्त होने का समय क्या है:
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सूर्योदय (Sunrise): सुबह 05:47 बजे
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सूर्यास्त (Sunset): शाम 07:20 बजे
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(नोट: चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय स्थानीय समयानुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है, लेकिन पंचांग के मुख्य मुहूर्त सूर्योदय के आधार पर ही तय होते हैं।)
पंचांग के 5 अंगों का विस्तृत विश्लेषण (Deep Dive into Panchang Elements)
एक सटीक और उपयोगी पंचांग केवल समय बताने का साधन नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं (Cosmic Energies) का एक नक्शा है। आइए आज के पंचांग के पांच अंगों का विस्तार से अध्ययन करें।
1. तिथि: आषाढ़ शुक्ल अष्टमी (Ashadh Shukla Ashtami)
आज आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, जो 22 जुलाई की सुबह 05:16 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को देवी दुर्गा (शक्ति) की पूजा के लिए परम पवित्र माना जाता है। इसे मासिक दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है।
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अष्टमी तिथि का प्रभाव: यह तिथि शक्ति, ऊर्जा, और साहस का प्रतीक है। इस दिन तंत्र-मंत्र की साधना, देवी उपासना, और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए किए गए अनुष्ठान विशेष फलदायी होते हैं।
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क्या करें: आज के दिन मां दुर्गा या अपनी कुलदेवी की पूजा अवश्य करें। दुर्गा चालीसा का पाठ करना शुभ रहेगा।
2. वार: मंगलवार (Tuesday)
मंगलवार का दिन शक्ति के देवता भगवान हनुमान और उग्र ग्रह मंगल (Mars) का दिन है। मंगल ग्रह को भूमि, रक्त, साहस, सेना और तकनीक का कारक माना जाता है।
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दिन की प्रकृति: यह दिन कठोर कार्यों, प्रशासनिक निर्णयों, जमीन की खरीद-फरोख्त, और मेडिकल/सर्जरी से जुड़े कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है।
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विशेष: कर्ज चुकाने के लिए मंगलवार का दिन सबसे उत्तम होता है, लेकिन इस दिन नया कर्ज लेने से बचना चाहिए, अन्यथा उसे चुकाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
3. नक्षत्र: चित्रा (Chitra Nakshatra)
आज रात 08:48 बजे तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। आकाश मंडल में कुल 27 नक्षत्र हैं, जिनमें से चित्रा 14वां नक्षत्र है।
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नक्षत्र का अर्थ और स्वामी: ‘चित्रा’ का अर्थ होता है सुंदर या चमकता हुआ। इस नक्षत्र के अधिपति ग्रह मंगल देव हैं और इसके इष्ट देव भगवान विश्वकर्मा (देवताओं के शिल्पकार) हैं।
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प्रभाव: यह नक्षत्र कला, वास्तुकला (Architecture), डिजाइनिंग, फैशन और रचनात्मक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ है। आज के दिन यदि आप कोई नया घर डिजाइन करवा रहे हैं, आभूषण खरीद रहे हैं, या कोई रचनात्मक प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं, तो चित्रा नक्षत्र उसमें चार चांद लगा देगा। रात 08:48 के बाद स्वाति नक्षत्र लगेगा, जो राहु का नक्षत्र है।
4. योग: सिद्ध योग (Siddha Yoga)
आज शाम 06:24 बजे तक ‘सिद्ध योग’ है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस योग में किए गए सभी कार्य ‘सिद्ध’ (सफल) होते हैं।
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सिद्ध योग की महिमा: ज्योतिष में इस योग को बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना गया है। यदि आप कोई विद्या सीखना शुरू कर रहे हैं, किसी गुरु से दीक्षा ले रहे हैं, या कोई नया व्यापार आरंभ कर रहे हैं, तो सिद्ध योग उसमें सफलता की गारंटी देता है। शाम 06:24 के बाद ‘साध्य योग’ शुरू होगा, जो भी शुभ प्रकृति का ही योग है।
5. करण: विष्टि (भद्रा) और बव करण
करण तिथि का आधा भाग होता है। आज पंचांग का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि आज शाम 04:34 बजे तक विष्टि करण रहेगा, जिसे आम बोलचाल में ‘भद्रा’ (Bhadra) कहा जाता है।
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भद्रा का ध्यान रखें: ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन माना गया है। भद्रा का स्वभाव अत्यंत क्रोधी और उग्र है। इसलिए, भद्रा काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नई गाड़ी खरीदना, नया व्यवसाय शुरू करना) पूरी तरह से वर्जित होता है।
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समाधान: यदि कोई अति आवश्यक कार्य है जिसे टाला नहीं जा सकता, तो भगवान शिव की आराधना करके ही उसे करें। शाम 04:34 बजे के बाद भद्रा समाप्त हो जाएगी और बव (भाव) करण शुरू होगा, जो सात्विक और शुभ कार्यों के लिए उत्तम है।
21 जुलाई 2026 के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat Today)
हिंदू धर्म में किसी भी काम को करने के लिए शुभ समय का चुनाव किया जाता है, ताकि उस काम में निर्विघ्न सफलता प्राप्त हो सके।
| शुभ मुहूर्त का नाम | समय अवधि (Timings) | महत्व (Significance) |
| अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurat) | दोपहर 12:06 से 01:00 बजे तक | यह दिन का सबसे शक्तिशाली और शुभ मुहूर्त होता है। भगवान शिव ने इसी मुहूर्त में त्रिपुरासुर का वध किया था। यह मुहूर्त हर तरह के दोषों का नाश करने में सक्षम है। (नोट: भद्रा के कारण बड़े मांगलिक कार्य शाम 4:34 के बाद ही करें, लेकिन दैनिक महत्वपूर्ण मीटिंग या निर्णय अभिजित में लिए जा सकते हैं)। |
| गोधूलि बेला (Godhuli Vela) | सूर्यास्त के ठीक पहले का समय | इस समय वातावरण में सात्विक ऊर्जा होती है। भगवान की आरती और दीपदान के लिए यह समय सर्वोत्तम है। |
(ध्यान दें: आज भद्रा काल शाम 04:34 तक है, इसलिए गृह प्रवेश, विवाह, या बड़े निवेश जैसे कार्यों को शाम 04:34 के बाद ही अंजाम देना शास्त्र सम्मत रहेगा।)
आज का अशुभ समय: राहुकाल और अन्य विचार (Ashubh Samay / Rahu Kaal)
जैसे शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाता है, वैसे ही अशुभ समय में नए और मांगलिक कार्यों को टालना चाहिए। आज का सबसे प्रमुख अशुभ समय ‘राहुकाल’ है।
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राहुकाल (Rahu Kaal): दोपहर 03:56 बजे से शाम 05:38 बजे तक।
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राहुकाल क्या है? यह दिन का वह समय होता है जिस पर राहु ग्रह का प्रभाव सबसे अधिक होता है।
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क्या न करें: राहुकाल में भूलकर भी कोई नया व्यवसाय शुरू न करें, किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करें, नई गाड़ी या प्रॉपर्टी न खरीदें और न ही किसी लंबी यात्रा की शुरुआत करें। राहुकाल में किए गए कार्य अक्सर उलझ जाते हैं या उनमें बाधाएं आती हैं।
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क्या करें: राहुकाल के दौरान दैनिक नियमित कार्य (Routine Work) किए जा सकते हैं। इस समय भगवान शिव या काल भैरव का स्मरण करना राहु के दोषों को कम करता है।
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सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (Position of Sun & Moon)
ज्योतिष में सूर्य को आत्मा और चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। इनकी स्थिति हमारे दैनिक जीवन की घटनाओं को गहरे स्तर पर प्रभावित करती है।
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सूर्य राशि (Sun in Cancer): सूर्य देव वर्तमान में अपनी मित्र राशि ‘कर्क’ (Cancer) में गोचर कर रहे हैं। कर्क जल तत्व की राशि है और सूर्य अग्नि तत्व के ग्रह हैं। यह गोचर भावनाओं, घर-परिवार, और मातृभूमि के प्रति लगाव को बढ़ाता है। इस समय लोगों में अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर अधिक जागरूकता रहती है।
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चंद्र राशि (Moon in Virgo to Libra): चंद्रमा आज सुबह 07:54 बजे तक कन्या राशि में रहेंगे। कन्या राशि में चंद्रमा होने से व्यक्ति का दिमाग विश्लेषण (Analysis) और साफ-सफाई की तरफ ज्यादा दौड़ता है। सुबह 07:54 के बाद चंद्रमा शुक्र की राशि तुला (Libra) में प्रवेश कर जाएंगे। तुला राशि में चंद्रमा का जाना मन में संतुलन, कूटनीति (Diplomacy), सौंदर्य और रिश्तों में मधुरता लाने का प्रयास करेगा।
विक्रम संवत 2083, ऋतु और आयन का ज्योतिषीय महत्व
पंचांग में संवत्सर, ऋतु और आयन का जिक्र भी महत्वपूर्ण होता है, जो प्रकृति के व्यापक चक्र को दर्शाते हैं।
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संवत्सर (Samvatsar): वर्तमान में विक्रम संवत 2083 चल रहा है। इस वर्ष के संवत्सर का नाम ‘पराभव’ (उत्तर भारत की मान्यता के अनुसार ‘रौद्र’) है।
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आयन (Ayan – Dakshinayan): वर्तमान में सूर्य देव दक्षिणायन में चल रहे हैं। दक्षिणायन का समय देवताओं की रात्रि माना जाता है। यह समय साधना, तपस्या, व्रत-उपवास (जैसे चातुर्मास, सावन, नवरात्रि) और पितरों की शांति के कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ होता है। इस दौरान भौतिक सुखों की बजाय आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान देना चाहिए।
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ऋतु (Season – Varsha): वर्षा ऋतु चल रही है। आयुर्वेद के अनुसार, इस ऋतु में वात दोष बढ़ जाता है और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए पंचांग भी हमें यह संकेत देता है कि इस समय हल्का, सुपाच्य और ताजा भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।
मंगलवार और आषाढ़ शुक्ल अष्टमी के दिन क्या करें और क्या न करें? (Do’s and Don’ts Today)
पंचांग के विश्लेषण के आधार पर, 21 जुलाई 2026 के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम और सावधानियां इस प्रकार हैं:
क्या करें (Do’s)
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हनुमान जी की पूजा: आज मंगलवार है, इसलिए सुबह स्नान के बाद हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें।
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देवी उपासना: आज शुक्ल पक्ष की अष्टमी है। दुर्गा माता को लाल पुष्प (गुड़हल) अर्पित करें और उनके सिद्ध मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ का कम से कम 108 बार जाप करें।
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रचनात्मक कार्य: चित्रा नक्षत्र के प्रभाव के कारण आज पेंटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, लेखन, या किसी भी आर्ट प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए बेहतरीन दिन है।
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मंगल ग्रह की शांति: यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष (मांगलिक) है, तो आज के दिन शिवलिंग पर लाल चंदन मिश्रित जल चढ़ाएं।
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कर्ज चुकाएं: यदि आपने किसी से उधार लिया है या बैंक का लोन है, तो उसकी किस्त चुकाने या कर्ज खत्म करने के लिए आज का दिन बहुत अनुकूल है।
क्या न करें (Don’ts)
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भद्रा काल में शुभ कार्य न करें: शाम 04:34 बजे तक भद्रा है। इस दौरान कोई भी नया या मांगलिक कार्य शुरू करने से बचें।
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नया कर्ज न लें: मंगलवार को कभी भी उधार या कर्ज नहीं लेना चाहिए। इस दिन लिया गया कर्ज जल्दी चुकता नहीं होता और परेशानियां बढ़ाता है।
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राहुकाल में यात्रा से बचें: दोपहर 03:56 से शाम 05:38 (राहुकाल) के दौरान किसी महत्वपूर्ण व्यावसायिक यात्रा या शुभ यात्रा की शुरुआत न करें।
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मांस-मदिरा का त्याग: अष्टमी तिथि और मंगलवार दोनों ही पवित्रता के प्रतीक हैं। आज के दिन पूर्ण रूप से सात्विक आहार लें और तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से सख्त परहेज करें।
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क्रोध न करें: मंगल उग्र ग्रह है, इसलिए आज के दिन किसी से अकारण विवाद या झगड़ा करने से बचें, अन्यथा कानूनी मामलों में फंस सकते हैं।
आज का विशेष ज्योतिषीय उपाय (Astrological Remedy for 21 July 2026)
हर दिन को शुभ और मंगलमय बनाने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं। 21 जुलाई 2026 की ग्रह स्थिति (मंगलवार + चित्रा नक्षत्र + अष्टमी) को देखते हुए आज का अचूक उपाय नीचे दिया गया है:
धन और कार्यों में सफलता के लिए अचूक उपाय:
आज शाम के समय (गोधूलि बेला में या भद्रा समाप्त होने के बाद) हनुमान जी के मंदिर जाएं। उन्हें चमेली के तेल का दीपक जलाएं और सिंदूर अर्पित करें। इसके बाद, माता दुर्गा के मंदिर में या घर के मंदिर में ही एक लाल चुनरी और नारियल चढ़ाएं।
हनुमान जी बल और बुद्धि के दाता हैं, और माता दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं। इन दोनों की संयुक्त कृपा से आपके रुके हुए सभी काम आज से ही गति पकड़ने लगेंगे। यदि व्यवसाय में मंदी चल रही है, तो आज 9 गरीब या जरूरतमंद कन्याओं को कुछ मीठा (जैसे हलवा या खीर) अवश्य खिलाएं। यह उपाय आपके जीवन में चमत्कारिक रूप से सकारात्मक बदलाव लाएगा।
21 जुलाई 2026 का पंचांग हमें यह बताता है कि आज का दिन मिली-जुली ऊर्जाओं वाला है। एक तरफ जहाँ चित्रा नक्षत्र और सिद्ध योग सफलता के नए द्वार खोल रहे हैं, वहीं दिन के पहले हिस्से में व्याप्त भद्रा और दोपहर में राहुकाल हमें सावधानी बरतने की चेतावनी दे रहे हैं। समय के इस विज्ञान (Time-Science) का सही उपयोग करके हम अपने जीवन को अधिक सुखी, सुरक्षित और प्रगतिशील बना सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: पंचांग की यह जानकारी वैदिक ज्योतिष की सामान्य गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी विशेष या बड़े मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से पहले अपने स्थानीय योग्य ज्योतिषाचार्य से अपनी व्यक्तिगत कुंडली (Horoscope) का विश्लेषण अवश्य कराएं।)