PMKSY 2026: हर खेत को पानी! प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में ऑनलाइन आवेदन, 90% सब्सिडी और फायदे (Full Guide)

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की आधी से अधिक आबादी आज भी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर खेती पर निर्भर है। लेकिन, भारतीय कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से ‘सिंचाई (Irrigation)’ रही है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और अनियमित मानसून के कारण वर्ष 2026 में खेती करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। कहीं भारी बारिश तो कहीं भयंकर सूखा—इस अनिश्चितता ने किसानों की नींद उड़ा रखी है।

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Title: PMKSY 2026: ‘हर खेत को पानी’ का सपना होगा पूरा! प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में ऑनलाइन आवेदन, सब्सिडी और फायदे (Full Guide)

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Meta Description: Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana (PMKSY) 2026 की पूरी जानकारी हिंदी में। जानें ‘हर खेत को पानी’ और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के तहत ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई पर बंपर सब्सिडी, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और पात्रता।

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PMKSY 2026: ‘हर खेत को पानी’ का सपना होगा पूरा! प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में ऑनलाइन आवेदन, सब्सिडी और फायदे (Full Guide)

खेती-किसानी पूरी तरह से पानी पर निर्भर है। भारत में आज भी कृषि का एक बहुत बड़ा हिस्सा मानसून (Monsoon) के भरोसे रहता है। लेकिन वर्ष 2026 में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण मानसून का मिजाज काफी बदल चुका है। कभी भयंकर सूखा पड़ता है तो कभी बेमौसम बारिश होती है। ऐसे में घटता भूजल स्तर (Groundwater level) और सिंचाई की पुरानी तकनीकें किसानों के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी हैं।

किसानों को पानी की इस समस्या से निजात दिलाने और सिंचाई की आधुनिक तकनीकें उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana – PMKSY) एक बहुत बड़ी पहल है। इस योजना का मूल मंत्र है— “हर खेत को पानी” (Har Khet Ko Pani) और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” (Per Drop More Crop – हर बूंद अधिक फसल)

अगर आप भी खेती करते हैं और अपने खेत में ट्यूबवेल, ड्रिप इरिगेशन (Drip Irrigation) या स्प्रिंकलर (Sprinkler) सिस्टम लगवाना चाहते हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपके लिए है। इस आर्टिकल में हम PMKSY 2026 की पूरी जानकारी, इसके प्रमुख घटक, मिलने वाली भारी सब्सिडी, और ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) क्या है?

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) भारत सरकार के कृषि, जल संसाधन और ग्रामीण विकास मंत्रालयों की एक संयुक्त पहल है। इसे वर्ष 2015-16 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश में खेती योग्य भूमि का विस्तार करना, पानी की बर्बादी को रोकना और सिंचाई के लिए आधुनिक उपकरणों (Micro-irrigation) के उपयोग को बढ़ावा देना है।

2026 तक आते-आते यह योजना पूरी तरह से तकनीकी रूप से उन्नत हो चुकी है। अब जियो-टैगिंग (Geo-tagging) और सैटेलाइट मॉनिटरिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि योजना का लाभ सीधे असली किसान तक पहुंचे। इस योजना के तहत किसानों को अपने खेतों में सिंचाई उपकरण लगाने के लिए 45% से लेकर 90% तक की भारी सब्सिडी (Subsidy) प्रदान की जाती है।

योजना के मुख्य स्लोगन और उनका अर्थ:

  1. हर खेत को पानी: यह सुनिश्चित करना कि देश के हर किसान के खेत तक सिंचाई के लिए पानी की पहुंच हो, चाहे वह नहरों के माध्यम से हो, कुओं या चेक डैम के जरिए।

  2. पर ड्रॉप मोर क्रॉप (Per Drop More Crop): पानी की हर एक बूंद का अधिकतम उपयोग करना। इसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे कम पानी में ज्यादा पैदावार ली जा सके।

PMKSY के मुख्य उद्देश्य (Key Objectives)

भारत सरकार ने इस योजना को सिर्फ सब्सिडी बांटने के लिए नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में एक दीर्घकालिक ढांचागत विकास (Long-term Infrastructure Development) के लिए डिजाइन किया है:

  • सिंचाई कवरेज बढ़ाना: ‘हर खेत को पानी’ के विजन के तहत कृषि योग्य भूमि (Cultivable land) का विस्तार करना।

  • पानी की बर्बादी रोकना: खेतों में खुले पानी (Flood irrigation) से होने वाली पानी की बर्बादी को कम करना।

  • सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) को अपनाना: ड्रिप और स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई तकनीक को अपनाकर उपज में 20% से 50% तक की वृद्धि करना।

  • भूजल को रिचार्ज करना (Groundwater Recharge): वाटरशेड विकास के माध्यम से बारिश के पानी को सहेजना और जमीन के नीचे के जलस्तर को ऊपर लाना।

  • निजी निवेश को आकर्षित करना: सिंचाई के क्षेत्र में नई तकनीकों और प्राइवेट कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देना।

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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के 4 प्रमुख घटक (The 4 Pillars of PMKSY)

PMKSY एक बहुत बड़ी (Umbrella) योजना है, जिसके अंतर्गत 4 अलग-अलग विभाग मिलकर काम करते हैं। एक किसान के तौर पर आपको इन घटकों की जानकारी होनी चाहिए:

1. त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP – Accelerated Irrigation Benefit Programme)

यह घटक मुख्य रूप से बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित है। इसमें सरकार उन बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के लिए फंड देती है जो कई सालों से अटकी पड़ी हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर बड़े बांधों और नहरों का नेटवर्क तैयार करना है। (यह घटक सीधे व्यक्तिगत किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए काम करता है)।

2. हर खेत को पानी (HKKP – Har Khet Ko Pani)

इसका उद्देश्य माइनर इरिगेशन (Minor Irrigation) को मजबूत करना है।

  • इसमें नए जल स्रोतों का निर्माण किया जाता है (जैसे कुएं, ट्यूबवेल)।

  • पुरानी और बंद पड़ी जल संरचनाओं (तालाब, बावड़ी) की मरम्मत की जाती है।

  • नदियों, नहरों और खेतों के बीच कमांड एरिया डेवलपमेंट (CAD) का काम किया जाता है ताकि पानी सीधा खेत तक पहुंचे।

3. पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC – Per Drop More Crop)

यह किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और सीधा लाभ देने वाला घटक है।

  • इसमें सूक्ष्म सिंचाई तकनीक (Micro-irrigation) जैसे ड्रिप इरिगेशन (टपकन सिंचाई), मिनी स्प्रिंकलर, और बड़े स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर भारी जोर दिया जाता है।

  • खाद और पानी को एक साथ पौधों की जड़ों तक पहुंचाने के लिए ‘फर्टिगेशन’ (Fertigation) तकनीक को प्रमोट किया जाता है।

  • इसी घटक के तहत किसानों को सीधे बैंक खाते में सब्सिडी (DBT) दी जाती है।

4. वाटरशेड विकास (WDC – Watershed Development Component)

यह बंजर और असिंचित (Rainfed) इलाकों के लिए वरदान है।

  • इसमें बारिश के पानी को बहने (Runoff) से रोका जाता है।

  • मिट्टी और पानी के संरक्षण (Soil and Water Conservation) के लिए चेक डैम (Check dams), जल संचयन संरचनाएं (Water harvesting structures) और मेड़बंदी का काम किया जाता है।

PMKSY सब्सिडी और वित्तीय सहायता (Subsidy Details 2026)

सिंचाई उपकरणों (खासकर ड्रिप और स्प्रिंकलर) पर सब्सिडी का स्ट्रक्चर केंद्र और राज्य सरकारों की भागीदारी से तय होता है। सामान्यतः योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकार 60:40 (पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में 90:10) के अनुपात में उठाती हैं।

किसानों को मिलने वाली सब्सिडी उनके वर्ग (Category) और राज्य की नीतियों पर निर्भर करती है। आइए इसे एक टेबल के माध्यम से समझते हैं:

किसान की श्रेणी (Farmer Category) केंद्र सरकार का हिस्सा राज्य सरकार का हिस्सा (अनुमानित) किसान को मिलने वाली कुल सब्सिडी
लघु एवं सीमांत किसान (Small/Marginal Farmers) – 2 हेक्टेयर से कम जमीन 55% कई राज्य अपनी तरफ से 10% से 35% अतिरिक्त देते हैं। 55% से लेकर 90% तक
अन्य किसान (Other Farmers) – 2 हेक्टेयर से अधिक जमीन 45% राज्य सरकार का अतिरिक्त अनुदान लागू हो सकता है। 45% से लेकर 75% तक

विशेष नोट (2026 अपडेट): उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे कई राज्यों ने अपनी स्टेट पॉलिसी के तहत सूक्ष्म सिंचाई (PDMC) पर सब्सिडी को बढ़ाकर 80% से 90% तक कर दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस तकनीक को अपनाएं।

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम के फायदे (Why Choose Micro-Irrigation?)

पारंपरिक सिंचाई (नाली या बहाव से पानी देना) में लगभग 50-60% पानी भाप बनकर उड़ जाता है या जमीन में बेकार चला जाता है। 2026 के जल संकट में सूक्ष्म सिंचाई अपनाना एक मजबूरी भी है और जरूरत भी:

  1. पानी की भारी बचत: ड्रिप सिंचाई से लगभग 40% से 70% तक पानी की बचत होती है। कम पानी वाले इलाकों में भी किसान अच्छी फसल ले सकते हैं।

  2. पैदावार में वृद्धि: पौधों को जरूरत के हिसाब से पानी और पोषक तत्व मिलने से उपज (Yield) में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी होती है।

  3. बिजली और लेबर की बचत: मशीन से सीधा सिंचाई होने पर बिजली (पंप चलाने का समय) और मजदूरों की मजदूरी का खर्च बचता है।

  4. खरपतवार (Weeds) पर रोक: पानी सिर्फ पौधों की जड़ों में जाता है, जिससे बाकी जमीन सूखी रहती है और अनावश्यक घास या खरपतवार नहीं उगती।

  5. उर्वरक की बचत (Fertigation): पानी के साथ ही घुलनशील खाद (Liquid Fertilizers) देने से खाद सीधी जड़ों में जाती है, जिससे खाद की 30% तक बचत होती है।

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योजना के लिए पात्रता शर्तें (Eligibility Criteria)

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • नागरिकता और पेशा: आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए और पेशे से किसान होना चाहिए।

  • कृषि भूमि (Land Ownership): किसान के पास अपने नाम पर कृषि योग्य भूमि (Agricultural Land) होनी चाहिए। खसरा/खतौनी के वैध कागजात अनिवार्य हैं।

  • संस्थागत समूह: व्यक्तिगत किसानों के अलावा सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG), को-ऑपरेटिव सोसाइटीज, किसान उत्पादक संगठन (FPOs) और ट्रस्ट भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

  • किराये के किसान (Leased Land): कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करने वाले या 7 साल से अधिक की लीज पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान भी योग्य माने जाते हैं।

  • जल स्रोत की उपलब्धता: सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसान के पास खेत में कुआं, बोरवेल, तालाब या नहर के पानी का साधन होना चाहिए।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन या ऑफलाइन आवेदन से पहले निम्नलिखित दस्तावेजों की स्कैन कॉपी/फोटोकॉपी तैयार रखें:

  1. पहचान पत्र: आधार कार्ड (Aadhaar Card) – मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य है।

  2. जमीन के कागजात: खसरा, खतौनी या जमाबंदी की नवीनतम नकल।

  3. बैंक पासबुक: बैंक खाते की जानकारी (IFSC कोड के साथ) ताकि DBT के माध्यम से सब्सिडी सीधे खाते में आ सके।

  4. पासपोर्ट साइज फोटो: आवेदक की 2 नवीनतम रंगीन तस्वीरें।

  5. निवास प्रमाण पत्र (Domicile): राज्य का मूल निवासी होने का प्रमाण।

  6. जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate): यदि आवेदक SC/ST वर्ग से है (अतिरिक्त सब्सिडी लाभ के लिए)।

  7. सिंचाई स्रोत का प्रमाण: बिजली बिल, पंप सेट का बिल या शपथ पत्र (Affidavit) कि सिंचाई का साधन उपलब्ध है।

PMKSY 2026 में ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Online Apply Process)

चूंकि कृषि राज्य का विषय (State Subject) है, इसलिए इस योजना के तहत आवेदन करने की प्रक्रिया हर राज्य के कृषि या उद्यानिकी (Horticulture) विभाग के पोर्टल के माध्यम से होती है। हालांकि, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार 2026 में प्रक्रिया को काफी सरल और डिजिटल (Paperless) कर दिया गया है।

नीचे सामान्य ऑनलाइन आवेदन की चरणबद्ध प्रक्रिया दी गई है (जैसे यूपी में पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल, राजस्थान में राज किसान साथी, या एमपी में e-Krishi Yantra Anudan पोर्टल):

स्टेप 1: अपने राज्य के कृषि पोर्टल पर जाएं

सबसे पहले अपने राज्य के कृषि विभाग या हॉर्टिकल्चर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर विजिट करें।

उदाहरण: UP के किसान upagriculture.com पर, MP के किसान dbt.mpdage.org पर जा सकते हैं।

स्टेप 2: किसान पंजीकरण (Farmer Registration)

अगर आपने पोर्टल पर पहले से रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, तो ‘New Farmer Registration’ पर क्लिक करें। अपना आधार नंबर, मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स डालकर खुद को रजिस्टर करें। एक रजिस्ट्रेशन आईडी (Registration ID) जनरेट होगी।

स्टेप 3: सिंचाई उपकरण/योजना का चयन करें

लॉगिन करने के बाद योजनाओं की सूची में से “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY – Per Drop More Crop)” या “सूक्ष्म सिंचाई/ड्रिप/स्प्रिंकलर अनुदान” वाले विकल्प पर क्लिक करें।

स्टेप 4: फॉर्म भरें और दस्तावेज अपलोड करें

अपनी जमीन का विवरण (जिला, तहसील, खसरा नंबर, रकबा) भरें। आप कौन सी कंपनी (Empaneled Vendor) से सिस्टम लगवाना चाहते हैं, उसका चयन करें। इसके बाद सभी जरूरी दस्तावेजों (आधार, खतौनी, बैंक पासबुक) को PDF/JPG फॉर्मेट में अपलोड करें।

स्टेप 5: सबमिट और रसीद (Acknowledgment)

फॉर्म पूरा भरने के बाद ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें। आपको एक पावती रसीद (Application Reference Number) मिल जाएगी। इसे भविष्य में ‘एप्लीकेशन स्टेटस’ चेक करने के लिए सेव या प्रिंट कर लें।

स्टेप 6: भौतिक सत्यापन (Physical Verification)

आपका फॉर्म ऑनलाइन अप्रूव होने के बाद, कृषि/उद्यान विभाग का अधिकारी (जैसे कृषि पर्यवेक्षक या पटवारी) आपके खेत का भौतिक सत्यापन (Physical inspection) करने आएगा।

स्टेप 7: उपकरण की स्थापना और जियो-टैगिंग

सत्यापन के बाद पंजीकृत डीलर (Vendor) आपके खेत में ड्रिप/स्प्रिंकलर सिस्टम लगा देगा। सिस्टम लग जाने के बाद अधिकारी उसकी जियो-टैगिंग (Geo-tagged photo) करेगा।

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स्टेप 8: सब्सिडी का भुगतान (DBT)

प्रक्रिया पूरी होने के 15 से 30 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि सीधे आपके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेज दी जाएगी, या डीलर के खाते में एडजस्ट कर दी जाएगी (राज्य के नियमों के अनुसार)।

ऑफलाइन आवेदन: यदि आप ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं, तो आप अपने जिले के उप निदेशक कृषि (DDA), उद्यानिकी अधिकारी, या नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC/e-Mitra) पर जाकर भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

योजना में तकनीकी एकीकरण का महत्व (Role of Technology in 2026)

2026 आते-आते PMKSY में भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है:

  • सैटेलाइट मैपिंग (Bhuvan Portal): ISRO के ‘भुवन’ पोर्टल के जरिए वाटरशेड प्रोजेक्ट्स और खेतों की लाइव ट्रैकिंग की जाती है।

  • PFMS (Public Financial Management System): बिचौलियों को खत्म करने के लिए सब्सिडी का पैसा PFMS के जरिए सीधा किसान के खाते में बिना किसी देरी के पहुंचाया जाता है।

  • मोबाइल ऐप: कई राज्यों ने अपने ऐप लॉन्च कर दिए हैं जिससे किसान खुद अपने खेत से सिस्टम की फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 2026 भारत की कृषि तस्वीर बदलने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। आज के समय में पानी की हर एक बूंद कीमती है। पारंपरिक सिंचाई के तरीके न केवल जल संकट को बढ़ा रहे हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी खत्म कर रहे हैं।

“पर ड्रॉप मोर क्रॉप” (Per Drop More Crop) के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम अपनाकर किसान न केवल अपना पैसा और पानी बचा रहे हैं, बल्कि अधिक मुनाफा भी कमा रहे हैं। भारी सब्सिडी (50% से 90% तक) के कारण अब यह महंगी तकनीक छोटे किसानों की पहुंच में भी आ गई है।

यदि आपके पास खेत है, तो आज ही इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन करें। जल ही जीवन है, और खेती में जल ही ‘धन’ है। सही तकनीक अपनाएं, पानी बचाएं और खेती को लाभदायक बनाएं!

(FAQs)

1. PMKSY के तहत लघु एवं सीमांत किसानों (Small and Marginal Farmers) को कितनी सब्सिडी मिलती है?

लघु (1-2 हेक्टेयर) और सीमांत (1 हेक्टेयर से कम) किसानों को केंद्र सरकार की ओर से सूक्ष्म सिंचाई (PDMC) पर बेस सब्सिडी 55% मिलती है। इसके अलावा राज्य सरकारें अपना अतिरिक्त अनुदान भी जोड़ती हैं, जिससे यह सब्सिडी 80% से 90% तक हो जाती है (राज्यानुसार भिन्न)।

2. क्या बिना खेत वाले किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं?

जी नहीं, इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास अपने नाम पर कृषि योग्य भूमि (Agricultural Land) होना अनिवार्य है। हालांकि, यदि आप 7 साल या उससे अधिक समय के लिए वैध लीज/किराये पर जमीन लेकर खेती कर रहे हैं, तो आप योग्य माने जा सकते हैं।

3. ड्रिप इरिगेशन (Drip) और स्प्रिंकलर (Sprinkler) में क्या अंतर है?

ड्रिप इरिगेशन (टपकन सिंचाई) में पानी पाइपों के माध्यम से बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों में दिया जाता है, जो सब्जियों और बागवानी फसलों (Horticulture) के लिए बेस्ट है। वहीं, स्प्रिंकलर में फव्वारे के रूप में बारिश की तरह पानी दिया जाता है, जो गेहूं, चना, सरसों जैसी सघन फसलों के लिए उपयुक्त होता है।

4. मैं PMKSY का अपना ऑनलाइन आवेदन स्टेटस (Application Status) कैसे चेक कर सकता हूँ?

आपने जिस राज्य के कृषि/उद्यानिकी पोर्टल (State Agriculture Portal) से आवेदन किया है, उसी वेबसाइट पर “आवेदन की स्थिति जांचें” (Track Application Status) का विकल्प होता है। वहां अपना आवेदन नंबर (Reference/Application Number) या आधार नंबर डालकर आप अपना ताज़ा स्टेटस देख सकते हैं।

5. अगर मैंने खेत में पहले ही ड्रिप सिस्टम लगवा लिया है, तो क्या मुझे योजना के तहत सब्सिडी मिलेगी?

सामान्यतः नहीं। सरकारी नियमों के अनुसार, सब्सिडी का लाभ लेने के लिए आपको पहले पोर्टल पर आवेदन करना होता है, विभाग से मंजूरी (Work Order) लेनी होती है, और सरकार द्वारा पंजीकृत (Empaneled) डीलर से ही उपकरण खरीदना होता है। बिना पूर्व-अनुमति (Pre-approval) के खुद से लगाए गए सिस्टम पर सब्सिडी क्लेम करना बहुत मुश्किल होता है।

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